भारतीय संस्कृति के अग्रणी राजदूत- गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर

अपडेट किया गया: 10 मई 2020

गुरुदेव राष्ट्रीयता एवं मानवीयता के पुंज और समन्वयक थे। आज की परिस्थितियों में कोरोना से लडने के लिए मानव को कैसे योद्धा के रूप में तैयार किया जा सकता है, उसके लिए दुनिया को गुरुदेव की गीतांजलि की ही जरूरत है। मैं आशा करता हूँ कि इस अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी के माध्यम से मानवता की रक्षा को समर्पित गुरुदेव के गीतों की गूँज पूरी दुनिया को सुनाई देगी।















शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया के तत्वाधान में गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगारे का 159वाँ जन्मोत्सव कार्यक्रम इस वर्ष 7 मई 2020, को वेबिनार के माध्यम से आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मेरे द्वारा मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में प्रतिभाग किया गया। मैंने अपने दिल्ली स्थित आवास पर गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर वेबिनार का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर विश्वाभारती, शान्तिनिकेतन के विद्यार्थियों द्वारा स्वस्ति-वाचन का उच्चारण कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक स्वरुप प्रदान किया गया। इस अवसर पर शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया की नवनिर्मित वेबसाइट www.tagoretop.com का विमोचन कर गुरुदेव के दर्शन एवं मानवता की सेवा में उनके द्वारा किये गए कार्यों का देश और दुनिया के साथ साक्षात्कार कराया गया।

गुरुदेव ने भारत को ही नहीं वरन एशिया को साहित्य का पहला नोबले पुरूस्कार दिलाया और अपने मानवतावादी और प्रकृति प्रेमी दार्शनिक, शिक्षाविद, समाजसेवक की छवि के अनुरूप स्वयं को विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान पर सुशोभित किया। गुरुदेव भारतीय संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर ले जाने वाले भारत के अग्रणी राजदूत थे जिनका जितना सम्मान देश के अन्दर होता है उससे कहीं ज्यादा दुनिया के अन्य देशों में प्राप्त है। मुझे अपनी 2017 में इंडोनेशिया की यात्रा का स्मरण है जब इंडोनेशिया में गुरुदेव के अनुयायिओं ने रामगढ़, उत्तराखंड में आकर उनकी विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिये अपना योगदान देना चाहा था। गुरुदेव ने रामगढ़ में शान्तिनिकेतन की स्थापना का स्वप्न संजोया था जिसे हमें यथार्थ रूप देने के लिए यहाँ वैश्विक स्तर का एक उच्च शिक्षण एवं शोध संस्थान स्थापित कर साकार करना होगा।


आज जब दुनिया कोविड-19 महामारी का सामना कर रही है तब शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया द्वारा गुरुदेव की कर्मस्थली-तपस्थली से गुरुदेव के 159वें जन्मोत्सव पर आयोजित अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन सराहनीय है। मेरा पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखंड के जनपद नैनीताल में स्थित रामगढ़ वही स्थान है जहाँ गुरुदेव ने शान्तिनिकेतन की स्थापना का स्वप्न देखा था तथा गीतांजलि के रूप में गीतों की अंजलि पूरी दुनिया को समर्पित की थी।

गुरुदेव राष्ट्रीयता एवं मानवीयता के पुंज और समन्वयक थे। आज की परिस्थितियों में कोरोना से लडने के लिए मानव को कैसे योद्धा के रूप में तैयार किया जा सकता है, उसके लिए दुनिया को गुरुदेव की गीतांजलि की ही जरूरत है। मैं आशा करता हूँ कि इस अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी के माध्यम से मानवता की रक्षा को समर्पित गुरुदेव के गीतों की गूँज पूरी दुनिया को सुनाई देगी।

गुरुदेव ने गाँवों के देश भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ग्रामीण पुनर्निर्माण के श्रीनिकेतन मॉडल की कल्पना की थी जिससे प्रेरित होकर भारत के माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया का पांच सूत्रीय वाक्यों पर आधारित विचार क्रियान्वित किया है जोकि दुनिया के सबसे बडे युवा देश भारत की समृद्धि का आधार बनने वाला है।

मेरा मानना है कि हिमालय से जिस प्रकार गंगा उद्गमित होती है उसी प्रकार हिमालय से ही देश और दुनिया के कल्याण के लिए एक शिक्षा रुपी गंगा भी प्रवाहित होनी चाहिए। इस हेतु विस्वा-भारती तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए एक आदर्श संस्थान की स्थापना हेतु सहमति बनी है एवं उसके क्रियान्वयन के प्रयास जारी हैं।