चुनौतियों को अवसरों में बदलता भारत

निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई), कम लागत वाले वेंटिलेटर, टेस्टिंग तकनीक और विश्लेषणात्मक उपकरणों में हमारे शीर्ष संस्थानों के स्टार्ट-अप और संकाय / विद्यार्थी नयी-नयी सफलता अर्जित कर रहें हैं। आज स्थिति यह है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख पीपीई किट और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। आपदा को अवसर में बदलने का भारत का यह महान संकल्प हमें वैश्विक शक्ति बनाने में सक्षम है।



प्रधानमंत्री जी ने कोरोना वायरस से जूझ रहे देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया है। कोरोना वायरस संक्रमण के संकट के दृष्टिगत देश की अर्थ व्यवस्था को नयी गति देने के लिए घोषित किया गया यह प्रोत्साहन पैकेज लॉकडाउन के 50वें दिन और 17 मई को लॉकडाउन का तीसरा चरण समाप्त होने के मात्र चार दिन पहले आया है। यह आर्थिक पैकेज देश के उस मजदूर, श्रमिक एवं किसान के लिए है, जो कठिन से कठिन परिस्थिति में, हर हाल में देशवासियों के लिए दिन-रात समर्पित भाव से कड़ा परिश्रम करता है। यह पैकेज जहाँ कठिनाई के इस दौर में भारतीय उद्योग जगत में विकास के नए युग का सूत्रपात करेगा वहीं इससे ईमानदारी से टैक्स अदा कर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मध्यमवर्गीय लोगों के हितों की रक्षा हो सकेगी।


इस पैकेज से कारोबार करने वालों विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को मदद मिलेगी। सरकार द्वारा घोषित कदमों से नकदी बढ़ेगी, उद्यमियों को सशक्त किया जा सकेगा और उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। महामारी के कारण लाखों प्रवासी कामगार भी बेरोजगार और बेघर हो गए हैं, आर्थिक पैकेज से भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी और यहां स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा। एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत भारतीय एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए 200 करोड़ रुपए तक के ठेकों के लिए कोई वैश्विक निविदा जारी नहीं की जाएगी।


विषमकालीन परिस्थितियों में समस्या को स्पष्ट रूप से राष्ट्र और जनता के सम्मुख ले जाना और आबादी को एकजुट कर राष्ट्रहित में निर्णय लेकर, प्रभावी नीतियों का सृजन कर सक्षम क्रियान्वयन सुनिश्चित करना बड़ी चुन्नौती है। संकट का समय देश के नेतृत्व एवं वहां की जनता की दोनों के लिए परीक्षा का समय होता है। विषम परिस्थितियों में सही रास्ते का चयन कर जनता को पूर्णतः आश्वस्त करने और उन्हें सरकार के फैसलों को पालन करने के लिए प्रेरित करना एक बड़ी चुन्नौती है। भारत के प्रधानमंत्री जी ने इन विषमकालीन परिस्थितियों में जिस धैर्य, नेतृत्व क्षमता का, समर्पण और दूरदर्शिता का परिचय दिया है उसकी न केवल भारत में बल्कि संपूर्ण विश्व में सराहना हो रही है। किसी भी प्रभावी संकट का समाधान प्रबल इच्छाशक्ति से और जमीन पर सही काम करके ही हो सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि प्रधानमंत्री जी का विकास यात्रा में सबको साथ लेकर चलने का संकल्प और "अनुमेय सर्वसम्मति" प्राप्त करना उन्हें एक अत्यंत कुशल नेतृत्व के रूप में स्थापित कर अलग पहचान प्रदान करता है।


संकट के प्रबंधन में संपूर्ण विश्व ने प्रधानमंत्री मोदी की उत्कृष्ट भूमिका को स्वीकार किया है। ऐसे समय में जब वैश्विक नेतृत्व की शिथिलता दुनिया भर में फैल रही है, निर्विवाद रूप से मोदी एक ऐसे नेता रहे हैं जो देश की घरेलू आवश्यकताओं और वैश्विक जिम्मेदारियों के बीच अद्भुत सामंजस्य लाने में कामयाब रहे हैं। वह शुरू से ही नियमित रूप से और सीधे देश की जनता के साथ संवाद करते रहे हैं। यह पहला मौका था जब इस संकट के दौरान दुनिया ने अपने तत्काल राष्ट्रीय सरोकारों से परे एक राष्ट्र को देखा। अपनी नेतृत्व क्षमता के चलते प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त आयी। मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए आह्वान करने वाले पहले वैश्विक नेता बने, चाहे सार्क देशो को एकजुट करने की कवायद हो, 55 से अधिक देशों को क्लोरो हाइड्रोक्विनीन देने का विषय हो या कई मित्र देशो को मेडिकल उपकरण देने की बात हो, प्रधानमंत्री जी ने "वसुधेव कुटुंबकम" के मूल मंत्र को यथार्थ में पालन किया है।


जब कोरोना संकट प्रारंभ हुआ तो देश की स्वास्थ्य तैयारियों के सम्बन्ध में कई सवाल किया गए, जिसका मुख्य कारण यह था कि देश में पीपीई किट नहीं बनती थी, एन-९५ मास्क का भारत में उत्पादन ना के बराबर था। आज सरकार द्वारा प्रत्यक्ष धन और संसाधनों के प्रवाह को आसान बनाने की कवायद के नतीजे अनुसंधान गतिविधियों में नवाचार के रूप में तेजी से दिखाई देने लगे हैं। अनुसंधान संस्कृति में सुधार को निर्देशित करने वाली नीतियों के साथ-साथ निवेश को मदद उद्योग जगत को प्रोत्साहित करने में सफल हो रहा है। संकट आया तो चिंता व्यक्त की जा रही थी कि हम अपनी हर आवश्यकता के लिए विदेशों पर निर्भर हैं, पर दो महीने से कम समय में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई), कम लागत वाले वेंटिलेटर, टेस्टिंग तकनीक और विश्लेषणात्मक उपकरणों में हमारे शीर्ष संस्थानों के स्टार्ट-अप और संकाय / विद्यार्थी नयी-नयी सफलता अर्जित कर रहें हैं। आज स्थिति यह है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख पीपीई किट और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। आपदा को अवसर में बदलने का भारत का यह महान संकल्प हमें वैश्विक शक्ति बनाने में सक्षम है। मेरा मानना है कि भारत के लोगो में अद्भुत क्षमता है अगर हम सब मिलकर इस संकट का सफलतापूर्वक मुकाबला करने का संकल्प लें तो कोई मुश्किल नहीं है। संकट के समाधान की प्रक्रिया में शिक्षा जगत उत्प्रेरक की भूमिका में सदैव अग्रणी रहेगा। प्रधानमंत्री जी के अगुवाई में आत्मनिर्भर भारत का हमारा लक्ष्य इसी दृढ़निश्चय और संकल्प से पूरा होगा। भारतीय नेतृत्व ने अब तक अच्छा किया है, लेकिन यदि राष्ट्र को इस तूफान को प्रभावी ढंग से मात देना है तो आगे जाकर इसे लोगों के समर्थन की आवश्यकता होगी। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत समूचे विश्व समुदाय को एक सन्देश दे पाया कि भारत एक जिम्मेदार और महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति है, जो साझा खतरों का मुकाबला करने हेतु वैश्विक सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।


देश में भारत ने चुपचाप, संकल्पित और प्रभावी रूप से, कई स्तरों पर इस महामारी का जवाब दिया और डटकर मुकाबला किया है। मुश्किलों के बावजूद सरकार का यह प्रयास रहा है कि जनता का मनोबल बना रहे और वे बिना किसी घबराहट के समस्या का मुक़ाबला कर सके। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी। आज हर देशवासी नए उत्साह के साथ कड़ी मेहनत कर रहा है और हमें विश्वास है कि संघर्षो के इस कठिन दौर से भारत अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और सक्षम बन कर उभरेगा।