वृहत्तर लोकहित हेतु सामूहिक भागीदारी की नई परिभाषा लिखता सहकारी संघवाद


युगपुरुष डाॅ0 अम्बेडकर जी का कहना था कि "संघ का अर्थ है एक द्वैत हुकूमत (दोहरे राज) की स्थापना। मसौदा संविधान में द्वैत हुकूमत के तहत केंद्र में केंद्र सरकार होगी और परिधि में राज्य सरकारें होंगी, जिनके पास वे संप्रभु शक्तियां होंगी, जिनका उपयोग वे संविधान द्वारा निर्दिष्ट क्षेत्रों में कर सकेंगी।" सहकारी संघवाद में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय वृहत्तर लोकहित में एक-दूसरे के साथ क्षैतिज संबंध स्थापित करते हुए एक-दूसरे के सहयोग एवं सामूहिक भागीदारी से समस्याओं को हल करने का प्रयास करते हैं। मैं समझता हूँ कि यह राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण, कार्यान्वयन और भारत की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के बेहतर समाधान हेतु राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। बदलते परिवेश में भारत का संघवाद विविधता में एकता का द्योतक है। विभिन्नता एक खूबसूरती है तो एकता इसकी नियति। इसीलिए संविधान निर्माताओं ने संघात्मक व्यवस्था की स्थापना की।


माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी सरकार की सहकारी संघवाद के प्रति हमेशा से प्रतिबद्धता रही है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने 2014 के आम चुनावों से पहले नई दिल्ली में दिए एक भाषण में कहा था कि भारतीय टीम में केवल प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद ही शामिल नहीं हैं, बल्कि इसमें 30 से अधिक मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। तथा 2014 में कामकाज संभालने के बाद कहा था कि वह केंद्र और राज्यों के बीच की खाई को पाटना चाहते हैं। इस हेतु पहला कदम योजना आयोग को 2014 में खत्म करने का फैसला था, जो सेंट्रलाइज्ड पॉलिसी बनाने में प्रमुख भूमिका निभाता आया था। योजना आयोग में राज्य सरकारों की कोई भूमिका नहीं होती थी। लेकिन संघीय ढांच को मजबूत करते हुए नीति आयोग में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इससे नीति निर्माण व उसके क्रियान्वयन में राज्यों को अधिक स्वतंत्रता प्राप्त हो सकी। दूसरा कदम 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करना था, इससे टैक्स से केंद्र को होने वाली आमदनी में राज्यों का हिस्सा 2015 में 32 से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया। साथ ही सरकार ने केंद्र की फंडिंग से चलने वाली योजनाओं में भी कुछ बदलाव किए, जिससे राज्यों की इनके बजट को लेकर स्वायत्तता बढ़ी। तीसरा सबसे अहम कदम 2016 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) कानून को पास करना और जुलाई 2017 में उसे लागू करना था। अप्रत्यक्ष कर के बंटवारे से जुड़े फैसले लेने के लिए जीएसटी काउंसिल बनाई गई, जो सहकारी संघवाद की एक और मिसाल थी। केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) का पुनर्गठन भी इस संदर्भ में व्यापक विकास के अनुरूप है।


माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के इन कदमों का देश के संघीय ढांचे को मजबूत बनाने पर सकारात्मक और टिकाऊ असर हुआ है। इनके जरिये राज्यों को मिलने वाले संसाधनों में बढ़ोतरी हुई, उन्हें अपनी सामाजिक-आर्थिक योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने की आजादी मिली है। मुख्यमंत्रियों की उपसमितियों ने कुशल भारत, स्वच्छ भारत, केंद्र प्रायोजित योजनाओं और डिजीटल भुगतान योजनाओं में भागीदारी दी है। वस्तु एवं सेवा कर निर्धारण भी मुख्यमंत्रियों की सहमति से शुरू किया जा रहा है। पहली बार केंद्र सरकार राज्यों के लिए ऐसी कोई खर्चीली योजनाएं नहीं बना रहा है और न ही लाद रहा है, जिनका कार्यान्वयन राज्यों को करना पड़े। माननीय प्रधानमंत्री जी का लक्ष्य देश को वित्तीय वर्ष 2024-2025 तक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है। और मेरा स्पष्ट मत है कि भारत की समृद्धि और विकास का अर्थ उसके सभी राज्यों का विकास है। इसे केंद्र और राज्य की साझेदारी के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता।


यह समय न केवल भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिये चुनौतीपूर्ण है बल्कि भारतीय संघीय ढाँचे के लिये भी परीक्षा का समय है। केंद्र सरकार ने इस महामारी के दौर में सभी राज्यों के साथ बराबर संवाद किया है। माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा ‘सहकारी संघवाद’ के सिद्धांत को साकार करते हुए सर्वदलीय बैठक की गई, ताकि सभी राजनीतिक दलों और प्रतिनिधियों की राय जानी जा सके और इस वैश्विक आपदा का सामना एकजुट होकर किया जा सके। प्रधानमंत्री जी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी लगातार मुख्यमंत्रियों से सीधा संवाद किया और कोरोना से निपटने के लिए उनसे चर्चा की। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण पर चर्चा करते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा कि भविष्य में जब कभी भारत की कोरोना के विरुद्ध लड़ाई का अध्ययन होगा, तो यह दौर इसलिए भी याद किया जाएगा कि कैसे इस दौरान हमने साथ मिलकर काम किया और सहकारी या सहयोगात्मक संघवाद का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया।


यह हर्ष का विषय है कि केंद्र और राज्यों की इकाइयों के बीच समन्वय स्थापित करने और राज्यों को उचित हिस्सेदारी प्रदान करने के लक्ष्य से ही भारत ‘सहकारी संघवाद’ की तरफ बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में संघवाद अब केंद्र-राज्य संबंधों की फ्रन्ट- लाइन न रहते हुए टीम इंडिया नामक एक नयी भागीदारी की परिभाषा बन चुका है। भारत की संघीय प्रणाली में एक बार फिर समय के अनुरूप बदलाव कर ‘सहकारी संघवाद’ का तत्व अपने प्रशासन के मूल्यों में समाहित किया गया है। साथ ही संघ और राज्य दोनों आर्थिक सुधारों और सामाजिक योजनाओं को सफल बनाने के लिए एक साथ कार्य कर रहे हैं।