जन्मदिवस पर स्वैच्छिक रक्तदान एवं वृक्षारोपण - राष्ट्र एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन


मित्रों, मैं अत्यंत अभिभूत हूँ कि मेरे जन्मदिवस के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर स्वैच्छिक रक्तदान एवं वृक्षारोपण के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। वस्तुतः इस स्वैच्छिक रक्तदान संवेदना कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी जब रुद्रप्रयाग के सुदूरवर्ती गाँव में सड़क दुर्घटना में घायल हमारी एक बहिन की मृत्यु समय पर रक्त न मिलने के कारण हुई। तभी से मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सभी महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, स्कूलों , गैर सरकारी संगठनों, धार्मिक एवं संस्थाओं के सहयोग से प्रदेश में व्यापक कार्यक्रम चलाया गया था। मैंने निश्चय किया कि हम सभी मित्र मिलकर विशेषकर जन्मदिन के दिन रक्तदान कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। आज के रक्तदान कार्यक्रम उसी श्रृंखला में आयोजित किये जा रहें हैं।


रक्तदान जीवनदान है। हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियों को बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। हमें मालूम है रक्त के इंतजाम के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। हमें सोचना चाहिए कि दुर्घटना या बीमारी का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी करीब 25 लाख यूनिट खून के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज दम तोड़ देते हैं। खून के एक यूनिट से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है किं मेरे मित्र और शुभचिंतक न केवल आज रक्तदान करते हैं बल्कि रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रांति को दूर करने कर रक्तदान हेतु प्रोत्साहित करने का काम भी करते हैं।


मैं सदैव विद्यार्थियों और मित्रों से पर्यावरण संरक्षण, जल संचय तथा अधिक से अधिक पेड़ लगाने की बात करता ही रहता हूँ। प्रकृति की तरफ अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए आज अपने जन्मदिवस के अवसर पर मैं भी एक पेड़ लगा रहा हूँ। और कहना चाहता हूँ कि आप भी अपने जन्मदिवस पर एक पेड़ जरूर लगाएं जिससे हमारा प्रत्येक जन्मदिन पेड़ के रूप में चिरकाल तक यादगार बना रहे। मुझे विश्वास है कि अपने इस छोटे से प्रयास से हम एक बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।


पुनः ह्रदय की गहराईयों से आप सभी का आभार।