शैक्षिक सहयोग को मजबूत करते भारत - कनाडा


1 जुलाई को, कनाडा अपने राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है। मैं इस अवसर पर कनाडा सरकार और वहां की जनता के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मैं इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की अपार संभावना के अवसर के रूप में भी देखता हूं। विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में भारत और कनाडा के बीच आपार संभावनाएं हैं। कनाडा की गुणवत्तापरक शिक्षा और वहां के सृजनात्मक शैक्षिक परिसरों से मई प्रभावित रहा हूँ। एक दशक पूर्व मेरी पुत्री ने भी बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की शिक्षा हेतु कनाडा को चुना था।


भारत और कनाडा दुनिया के दो प्रमुख लोकतंत्र हैं, जो सांझा मूल्यों को पोषित करते हैं। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत – कनाडा के मधुर संबंधों को "साझा मूल्यों की प्राकृतिक साझेदारी" के रूप में संदर्भित किया है। अगर आप टोरंटो या वैंकोवर की सडको पर चलेंगे तो आप स्वयं महसूस करेंगे कि हमारे संबंधों की मजबूती वहां के भारतीय समुदाय के जीवंत योगदान के कारण संभव हुई है। मजबूत आधारशिला पर टीके इन सम्बन्धो को पुष्पित-पल्लवित करने में शैक्षिक सहयोग एक महत्वपूर्ण कड़ी है।


भारत-कनाडा का आपसी संबंध हाल के वर्षों में मजबूत हुआ है। अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी और सहित क्षेत्रों में सार्थक सहयोग के साथ एक नयी इबारत लिखी जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में हम अपने घनिष्ठ और पुराने संबंध को नयी उंचाईयों तक ले जाने हेतु प्रतिबद्ध हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे बीच की राजनयिक और सांस्कृतिक समानताएं, जनतांत्रिक एवं मानवीय मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, छात्र गतिशीलता, अनुसंधान साझेदारी शैक्षिक सहयोग को दूसरे स्तर पर ले जाने में अत्यंत सहायक भूमिका निभा सकती है।


भारत और कनाडा ने शैक्षिक सहयोग के विस्तार और छात्र और संकाय गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। कनाडा हमारे कई छात्रों के लिए पसंद का स्थान बनता जा रहा है। मुझे बताया गया है कि कनाडा ई ब्यूरो फॉर इंटरनेशनल एजुकेशन के हालिया आंकड़ों के अनुसार, लगभग 34% विदेशी छात्र भारत से आते हैं। जबकि कनाडा से भारत आने वाले विद्यार्थियों की संख्या ऐतिहासिक रूप से कम रही है। यह रुझान न केवल भारत के लिए बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी दिखता है, मैं निकट भविष्य में भारत आने वाले कनाडाई छात्रों की संख्या में वृद्धि देखने के लिए बहुत आशान्वित हूं। यह सुनिश्चित करने के लिए हमने स्टडी इन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। मैं कनाडाई छात्रों को बताना चाहता हूं कि भारत के पास उन्हें देने के लिए बहुत कुछ है, और हम अपने शिक्षण संस्थानों में उनका स्वागत करना पसंद करेंगे। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली है, जिसमें 1000 से अधिक विश्वविद्यालय, 45000 डिग्री कॉलेज, 1300000 स्कूल, 10 मिलियन शिक्षक और 330 मिलियन छात्र हैं। हमारे संस्थान बेहद विविध हैं। हमारे आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी और हमारे कई सेंट्रल के साथ-साथ प्राइवेट यूनिवर्सिटी बहुत मजबूत शैक्षणिक आधार के साथ बहुत उच्च शैक्षणिक हैं। हम इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस की स्थापना की प्रक्रिया में हैं और कई नियामक और संरचनात्मक बदलाव ला रहे हैं जो हमारी शिक्षा की गुणवत्ता को और बढ़ावा देंगे। आज कई क्षेत्रो में हम विश्वस्तरीय शोध कर रहें है। चाहे जैव प्रौद्योगिकी हो, सुपर कंप्यूटिंग हो, प्रबंधन हो, अभियांत्रि की हो या अंतरिक्ष विज्ञान हो हम विश्व के बेहतरीन संस्थानों में शुमार है। मुझे प्रसन्नता है कि कनाडा में गुरुनानक जी को समर्पित पीठ की स्थापना की जा रही है।


अनुसंधान साझेदारी भारत-कनाडा शैक्षिक सहयोग में गतिविधि का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सहयोगी अनुसंधान और विनिमय कार्यक्रम के लिए कनाडा और भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच लगभग 300 संस्थागत समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। कनाडा के 98 प्रतिष्ठित संकाय सदस्य अभी तक भारतीय संस्थानों में अल्पकालिक शिक्षण कार्य के लिए भारत सरकार के जीआईएएन (ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क) कार्यक्रम के तहत भारतीय संस्थानों में पहुंचे हैं। कनाडा 28 देशों में से एक है, जो SPARC (शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए योजना) के तहत कवर किया गया है, जो एक MHRD पहल है, जिसका लक्ष्य भारतीय संस्थानों और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों के बीच अकादमिक और अनुसंधान सहयोग की सुविधा प्रदान कर के भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार करना है। हम संयुक्त रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रासंगिकता की समस्याओं को हल करने के लिए व्यापक सहयोग कर सकते है। 19 संयुक्त अनुसंधान प्रस्तावों को अब तक स्वीकार किया गया है।


शास्त्री इंडो-कैनेडियन इंस्टीट्यूट (SICI) द्वारा आयोजित कार्यक्रम के तहत कई छात्रों को गतिशीलता और कई अनुशासनात्मक और अंतःविषय क्षेत्रों पर संयुक्त अनुसंधान सहयोग की सुविधा प्रदान की जा रही है – यह गरिमापूर्ण संस्थान भारत–कनाडा सहयोग के लिए समर्पित 52 वर्षीय पुराना प्रमुख संस्थान है। संस्थान द्वारा प्रायोजित परियोजनाओं में से कुछ तकनीकी और प्रबंधकीय क्षमता का विकास कर अभिनव स्टार्ट-अप के लिए अनुकूल माहौल पैदा करते हैं। मुझे यह साझा करते प्रसन्नता है कि दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों में अभिनव अंतर्दृष्टि प्रदान करने का कार्य किया है। शहरी अध्ययन, पर्यावरण अध्ययन, लिंग अध्ययन, और कई और ऐसे क्षेत्रों में SICI शोधकर्ताओं के अग्रणी-बढ़त विश्लेषण से लाभ हुआ है। SICI की 50वीं वर्षगांठ पर, भारत और कनाडा दोनों के प्रधानमंत्रियों ने संस्था के निरंतर विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


मुझे बताया गया है कि कनाडा सरकार ने 2019 में एक बहु-विभागीय अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा रणनीति शुरू की है जिसका शीर्षक है बिल्डिंग ऑन सक्सेस। इसका एक प्रमुख लक्ष्य भारत जैसे देशों की छात्रयात्रा को बढ़ावा देना है, ताकि कनाडाई छात्र दक्षता, कौशल और नेटवर्किंग पृष्ठभूमि के साथ वापस आ सकें, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक मजबूत सार्थक कर सके। दोनों सरकारों के साथ दोनों दिशाओं में छात्र की गतिशीलता के लिए प्रतिबद्ध, आने वाले वर्षों में निरंतर विस्तार के एक पैटर्न को देखने की उम्मीद की जा सकती है। भारत और कनाडा के बीच निरंतर मित्रता को मजबूत करने के लिए छात्र गतिशीलता और अनुसंधान साझेदारी बहुत मजबूत इंजन हो सकते हैं। भारत एक बड़े पैमाने पर डिजिटल शिक्षा पर जोर दे रहा है, नियामक ढांचे और डिजाइनिंग पाठ्यक्रम ला रहा है। यह दोनों देशों के बीच सहयोग का एक और क्षेत्र हो सकता है। मुझे पूरा विश्वास है कि शिक्षा और अनुसंधान में भारत-कनाडा का संबंध दोनों देशों के लिए बड़े पैमाने पर विकास और विविधता रखेगा।


मैं हमेशा से कहता हूँ अगर आपके देश में कोई छात्र पढ़ने आये तो संपूर्ण जीवन के लिए आपका ब्रांड एम्बेसडर बन जाता है। आपसी सम्बन्धो को अधिक मजबूती देने हेतु में पुनः कनाडा के विद्यार्थियों को भारत के शैक्षिक संस्थानों का आमंत्रण देना चाहता हूँ।