शिक्षण व्यवस्था में डिजिटल क्रांति नए मुकाम पर

अपडेट करने की तारीख: 10 मई 2020

मैं, बच्चों, अध्यापकों और अभिभावकों को भी धन्यवाद् देता हूँ जिनके सहयोग और समर्पण से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं और शिक्षण व्यवस्था में डिजिटल क्रांति नए मुकाम पर पहुंचने की कोशिश कर रही है।



वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे चिकित्सा कर्मियों, पुलिस के जवानों, स्वच्छता कर्मियों आदि की सराहना करते हुए मैं, बच्चों, अध्यापकों और अभिभावकों को भी धन्यवाद् देता हूँ जिनके सहयोग और समर्पण से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं और शिक्षण व्यवस्था में डिजिटल क्रांति नए मुकाम पर पहुंचने की कोशिश कर रही है।

मुझे कोरोना महामारी के बीच कुछ अच्छी सम्भावनाएं भी नज़र आ रही हैं। “लॉकडाउन” का यह समय बच्चों, अध्यापकों और अभिभावकों तीनों के लिए विशेष अवसर लेकर आया है। सबके पास असीमित समय, घर जैसी प्रयोगशाला और इंटरनेट पर मौजूद दुनिया के सारे संसाधन चुटकियों में उपलब्ध हैं। ई-क्लासेस, प्रोजेक्ट्स, एक्टिविटीज और वीडियो प्रेजेन्टेशन मानो बच्चों के लिए तो पूरा घर ही लर्निंग सेंटर बन गया है। कल तक बैग व बस्ते के साथ विद्यालय जाने वाले बच्चे अब घर पर ही पूरी तन्मयता से पढ़ाई कर रहे हैं। लॉकडाउन के शुरुआती दौर में लूडो, शतरंज व कैरम बोर्ड के अलावा मोबाइल पर गेम व टेलीविजन देख मन बहलाने वाले बच्चे अब ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था होने से पूरा दिन पढ़ रहे हैं। वे घर बैठे ही टेस्ट देने के साथ अपनी उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज करा रहे हैं।


मेरा मानना है कि शिक्षकों के लिए खुद को अपग्रेड करने का यह सुनहरा अवसर है और मुझे ख़ुशी हो रही है कि शिक्षक ऑन-लाइन टीचिंग, ई- कंटेंट, खुद के वीडियो प्रेजेन्टेशन, लेसन प्लान, असाइनमेंट्स और मासिक सिलेबस के आधार पर क्वेश्चन पेपर तैयार करने के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाना शिक्षकों के लिए नया अनुभव था, लेकिन सैकड़ों छात्रों की दिलचस्पी ने इसे कारगर बना दिया है। अभिभावक भी इन क्षणों का उपयोग बच्चों के साथ खेलने, दोस्ती करने, भावनात्मक सहयोग देने, उनकी और खुद की कलाओं का विकास करने, परिवार के साथ यादगार समय बिताने में कर रहे हैं।


ये सत्य है कि ऑनलाइन शिक्षा कभी भी वर्तमान शिक्षा का विकल्प नहीं हो सकती, लेकिन वर्तमान परिपेक्ष्य में सभी को इस व्यवस्था को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। ऑनलाइन अध्ययन समय की मांग है। मैं, युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वे लॉकडाउन के समय का उपयोग घर पर बैठकर अतिरिक्त स्किल और डिग्री हासिल करने में करें। आज ऑनलाइन ऐसे कई प्लेटफॉर्म मौजूद हैं जिसके जरिए घर बैठे आप नए स्किल सीख सकते हैं अथवा कुछ अतिरिक्त डिग्री या सर्टिफिकेट हासिल कर सकते हैं, जो आपको करियर में आगे बढ़ने में मदद करेगा।


मैं, बताना चाहूंगा कि शिक्षा विभाग की ओर से दूरदर्शन पर उपलब्ध कराई जा रही शिक्षण सामग्री से हजारों छात्र-छात्राएं लाभ ले रहे हैं। ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विभिन्न वेबसाइटों के माध्यम से शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवाई है। उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए मंत्रालय ने ‘शोध सिंधु’जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए हैं। शोध सिंधु के माध्यम से छात्रों को हजारों जर्नल और लाखों पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। ई-प्लेटफार्म शोध सिंधु के माध्यम से छात्र को 10,000 राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय जर्नल और 31 लाख 35 हजार पुस्तकों उपलब्ध कराई गई हैं।


मुझे विश्वास है कि कोरोना संकट के बाहर निकलने के बाद हमारे देश की पढ़ाई का तरीका बिलकुल नये कलेवर में होगा। जिससे आने वाले दिनो में देश को ऐसे युवा मिलेंगे जो नये आयाम बनाने में विश्व में सबसे आगे रखेंगे।